Kashi Katha, 2016

“इक्कीसवी सदी में काशी”

6-7 February 2016

Venue: K.N. Udupa Auditorium, IMS, BHU, Varanasi

Timing: 10:00 AM to 6:00 PM

Day 1 (6-2-16)

काशी को आधुनिक समय के परिपे्रक्ष्य में चार स्तरों व्यकित, परिवार, समाज और प्रकृति के आधार पर समझने की आवश्यकता है। समकालीन समाज में व्यकित विश्लेषण के साथ-साथ भूमिका निर्वहन भी आज की महती आवश्यकता है। जिस दिन खुद की भूमिका तय हो जायेगाी, प्रौधोगिकी भी वैशिवक स्तर पर काशी की मदद करने को तैयार होगी। प्राची और प्रतीचि को समझकर आगे बढ़ने के आवश्यकता है। आधुनिकता और परम्परा के समन्वय से न सिर्फ काशी की सांस्कृतिक विरासत अपितु यहां की सहज जीवनशैली भी अक्षुण्ण रहेगी। उä बाते आर्इo आर्इo टीo बीo एचo यूo के निदेशक प्रोo राजीव संगल ने आर्इo आर्इo टीo, बीo एचo यूo, चिकित्सा विज्ञान संस्थान एवं विज्ञान संस्थान काशी हिन्दू विश्वविधालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी “२१वीं सदी में काशी” के उदघाटन सत्र में कही। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में प्रोo संगल ने आर्इo आर्इo टीo, बीo एचo यूo द्वारा मानवीय मूल्य पाठयक्रम की शुरूआत को एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि आज बदलते दौर में लेक्चर से ज्यादा संवाद जरूरी है। स्मार्ट कार्यशैली को बढ़ावा देते हुए प्रो0 संगल ने बताया कि आर्इo आर्इo टीo, बीo एचo यूo अपने परिसर में जल्दी अलग सीवरेज व्यवस्था करने वाला है जिसके द्वारा निर्गत मल-जल परिसर के बाहर नहीं जायेगा। इस पहल को उन्होंने बनारस के लिए मील का पत्थर बताया। विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोo बच्चा सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर कूड़ा निस्तारण के लिए जन आन्दोलन को मौजूदा दौर की बड़ी जरूरत बताया।

विख्यात शास्त्रीय गायक डाo राजेश्वर आचार्य ने काशी को मोक्ष की जन्मभूमि बताते हुए कहा कि आधुनिक सदी में बनारस का भूगोल सुधारते-सुधारते इसके इति का हास हो रहा है। आज सिर्फ दृष्टिकोण में बदलाव की जरूरत है वरना बनारस अपने उत्पत्ति से ही स्मार्ट है। उदघाटन सत्र में प्रोo केo केo त्रिपाठी, चिकित्सा विज्ञान, प्रसिद्ध लोक गीतकार पंo हरिराम द्विवेदी, प्रोo विजय बहादुर सिंह उपसिथत रहे। काशीकथा २०१६ की विषय स्थापना आर्इo आर्इo टीo बीo एचo यूo के पूर्व निदेशक प्रोo एसo एनo उपाध्याय ने किया तथा संचालन प्रोo पीo केo मिश्रा ने किया।

पहले दिन के प्रथम सत्र “शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्योग सत्र की अध्यक्षता प्रोo एo एनo  त्रिपाठी, इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग आर्इo आर्इo टीo बीo एचo यूo ने की। प्रोo त्रिपाठी ने काशी हिन्दू विश्वविधालय की स्थापना के मूल में मालवीय जी के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए आधुनिक समाज को इन उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए कृत संकल्पित होने को बल दिया। शिक्षा संकाय के प्रोo हरिकेश सिंह ने उद्यमिता और कौशल को मानवीय संदर्भ में सकारात्मक बताते हुए शिक्षा को व्यकित की अंतर्निहित शकित के सर्वांगीण विकास का कारक बताया। वाराणसी में उधोग धन्धों के जनक श्री आरo केo चौधरी ने पूर्वांचल से उद्योगों के पलायन के लिए राज्य सरकार की औधोगिक नीति को सीधा कारण बताया है। उन्होंने बिहार को उत्तर प्रदेश से अधिक सकारात्मक औद्योगिक नीतियों का प्रदेश बताया। शहर उत्तरी के विधायक श्री रवीन्द्र जायसवाल ने ह्रदय योजना को शहर के स्वच्छता अभियान के लिए विशेष बताया तथा जायका योजना जो सिर्फ ३७ प्रतिशत तक ही पूरी हो पायी है की सफलता पर प्रश्नचिन्ह लगाया।

द्वितीय सत्र संचार, ऊर्जा, यातायात प्रबंधन, अवशिष्ट प्रबंधन एवं कृषि की अध्यक्षता आर्इo आर्इo टीo के प्रोo अनिल त्रिपाठी ने की। आस्ट्रेलिया से आर्इ सुश्री सू लेनाक्स ने बनारस में विगत वर्षों में हुये बदलावों को चिनिहत करते हुए गंगा की स्वच्छता को वैशिवक आवश्यकता बताया। बर्कले, कैलीफोर्निया से आर्इ सुश्री कैथरीन पोर्टर ने बनारस को खुबसुरत शहर की संज्ञा देते हुए तकनीकी स्तर पर विकसित करने पर बल दिया। गौरतलब है कि दोनों ही समाजसेवियाँ अपने देश में “Friends of Ganges” नामक संस्था चलाती है। कृषि वैज्ञानिक प्रोo आरo सी0 तिवारी ने कृषि की मदद के लिए किसानों की मदद करने का आहवान किया।

सत्र में उपस्थित महापौर रामगोपाल मोहले ने नागरिकों द्वारा यातायात सम्बन्धी अनुपालन को बड़ी जरूरत बताया। एसo पीo, यातायात सुधाकर यादव ने अव्यवसिथत वाहनों के खड़े होने तथा जगह की कमी को यातायात प्रबन्धन के संदर्भ में चिनिहत किया। अपनी अध्यक्षीय सम्बोधन में प्रो0 अनिल त्रिपाठी ने शहर को स्मार्ट बनाने के लिए समस्याओं को अवसर में तब्दील करने की जरूरत पर फोकस किया। सत्र का संचालन प्रोo एसo एनo उपाध्याय ने किया।

पहले दिन के अनितम सत्र ‘साहित्य, संगीत एवं कला’ का रहा जिसकी अध्यक्षता डा0 नाथ मिश्र ने की। डाo मिश्र ने साहित्य को समकालीन समाज से पुन: जोड़ने का आहवान करते हुए समकालीन आलोचनात्मक साहित्य को बदलने की भी बात कही। सत्र में उपसिथत प्रोo मंजुला चतुर्वेदी ने कला और साहित्य को बनारस की थाती बताया तथा इसके वैशिवक महत्व पर भी प्रकाश डाला। सत्र में बतौर मुख्य वक्ता डाo राजेश्वर आचार्य ने बनारस की सांगीतिक शैली पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला तथा आधुनिक गायन पद्धति में गुणदोशों का विवेचन किया। उक्त सत्र में प्रोo केo केo त्रिपाठी ने बनारस घराने एवं बनारसी कला को अक्षुण्ण रखने के लिए समस्त सामाजिक संस्थाओं को साथ मिलकर काम करने का आहवान किया। प्रसिद्ध लोकगीतकार पंo हरिराम द्विवेदी ने बनारस की खाटी लोकपक्ष को जनसमक्ष रखा। सत्र का संचालन प्रोo शशि सुभाष मिश्र ने किया।

उक्त अवसर पर अरविन्द कुमार मिश्र और बलराम यादव के द्वारा रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला की छायाचित्र प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। इस दो दिवसीय आयोजन में संगीत संध्या भी आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। आयोजन में विधान परिषद सदस्य डाo लक्ष्मण आचार्य, प्रोo प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, डाo नन्दलाल सिंह, डाo संतोष कुमार सिंह, डाo अवधेश दीक्षित, डाo अनूपपति तिवारी, डाo विकास सिंह, र्इशान,  धीरज, दिगिवजय, गोपेश, सूरज, राहुल, उपेन्द्र, आशुतोष, राजीव सहित अन्य प्रतिभागी उपसिथत रहे।

Day 2 (7-2-16)

“राजनीतिक स्थिति का हाल बनारस में किसी से छिपा नहीं है। आज सांसद के वेतन पर पूरी सांसदों की फौज एक साथ मेजें ठोकती है तो वही दूसरी ओर गरीबो की बात पर पूरी की पूरी संसद ठप रहती है। 1956 में जहां 20 लाख विधिक मामले लम्बित थे तो वही आज 2015 में लगभग 3 करोड़ 35 लाख विधिक मामले पूरे भारतवर्ष में लम्बित हैं। अकेले बनारस में 10 हजार से ऊपर केस पेन्डिग हैं। ऐसे में जरूरत है पुराने बनारस की समरसता को वापस लाने की। बनारस को स्मार्ट सिटी के बजाय ‘Edu City’ बनाने की जरूरत है। जिसमें सारी शिक्षा व्यवस्था एक साथ एक दूसरे शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े रहे।” उक्त उद्गार प्रसिद्ध साहित्यकार और खाटी बनारसी पण्डित धर्मशील चतुर्वेदी ने दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘21वीं सदी में काशी’ में व्यक्त की। सामाजिक, राजनीतिक एवं विधिक व्यवस्था तथा जनजीवन सत्र में वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य ने स्मार्ट सिटी की अवधारणा को वाराणसी के संदर्भ में निराधार बताया तथा अतीत विहीन वर्तमान के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा “जीने की तमन्ना में मरे जा रहे लोग, मरने की तमन्ना लिए जिया जा रहा मैं” जिस पर सुधिजनों ने ढेरों तालिया बजायी। सत्र की अध्यक्षता डॉ0 अत्रि भारद्वाज ने किया। सत्र में प्रो0 मंजीत चतुर्वेदी, उस्मानिया विश्वविद्यालय से आयी प्रो0 दुर्गेश नन्दिनी भी मौजूद थी। सत्र का संचालन डॉ0 अनूपपति तिवारी ने किया।

काशीकथा 2016 के अन्तिम दिन ‘इतिहास, धर्म एवं संस्कृति’ नामक सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो0 सीताराम दुबे ने पदार्थी परम्परा तथा शाब्दी परम्परा में विभेद करते हुए काशी को आध्यात्मिक और भौतिक रूप से सुन्दर बताया तथा इसको अक्षुण्ण रखने के लिए लोगों से कृत संकल्पित होने का आह्वाहन किया। “नफरत की आग बढ़ने न पाये बुझा के चल, एक और प्रेम प्यार की गंगा बहा के चल” कहते हुए मुफ्ती-ए-बनारस अब्दुल बातिन नोमानी ने हिन्दू-मुस्लिम एकता की पैरवी की तथा गंगा को दोनों ही कौमो के लिए पाक बताया। प्रो0 विभा त्रिपाठी ने नागर संस्कृति को वाराणसी के परिप्रेक्ष्य में रेखांकित करते हुए कहा कि धर्म तीर्थ, अर्थतीर्थ और कामतीर्थ की त्रिवेणी है काशी। पुरातात्विक दृष्टि से काशी की विरासत को अक्षुण्ण बनाये रखा 21वीं सदी में बहुत बड़ी चुनौती है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ0 कामेश्वर उपाध्याय ने काशी की सनातन परम्परा को पृथ्वी की उत्पत्ति से प्राचीन बताते हुए कहा कि बनारस को समझने के लिए वैदिक संस्कृति को समझना अपरिहार्य है। सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो0 सीताराम दूबे ने काशी को आध्यात्म के साथ भौतिक व्यवस्था का संवाहक बताया तथा सनातन परम्परा एवं तकनीक के समावेश को आधुनिक सदी के लिए आवश्यक बनाने का जोर दिया। सत्र का संचालन डॉ0 सुभाष चन्द्र यादव तथा सुजीत कुमार चौबे ने किया।

अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के अन्तिम दिन के अन्तिम सत्र ‘चिकित्सा’ की अध्यक्षता करते हुए चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो0 वी0के0 शुक्ल ने सामुदायिक सहभागिता को चिकित्सा के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण बताया। प्रो0 गोपालनाथ ने विकेन्द्रीकरण को बढ़ावा न दिये जाने की तथा सरकार से सरसुन्दर लाल अस्पताल को आर्थिक मदद देने की अपील की। शिशु स्वास्थ्य की गंभीरता पर चर्चा करते हुए प्रो0 ओ0पी0 मिश्रा ने घर से ही स्वच्छता बनाये रखने पर जोर दिया। प्रो0 मिश्र ने शारीरिक स्वच्छता को प्राथमिकता देने के लिए लोगों में जागरूकता लाने पर प्रकाश डाला। सत्र में प्रो0 वी0के0 जोशी उपस्थित थे। सत्र का संचालन डॉ0 संतोष कुमार सिंह एवं प्रो0 पी0के0 मिश्रा ने किया। अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के अन्तिम दिन अरविन्द कुमार मिश्र तथा बलराम यादव ने रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के चित्रों की प्रसंगवार व्याख्या की। रामलीला छायाचित्र प्रदर्शनी की गैलरी में दर्शनार्थ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भी उमड़ी।

अपने आप में अनूठी इस अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र का संचालन प्रो0 पी0के0 मिश्र ने किया तथा स्वागत भाषण आई0आई0टी0 बी0एच0यू0 के पूर्व निदेशक प्रो0 एस0एन0 उपाध्याय ने किया। आयोजन में डॉ0 नन्दलाल सिंह, प्रो0 प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, डॉ0 अवधेश दीक्षित, डॉ0 अनूपपति तिवारी, डॉ0 विकास सिंह, धीरज, ईशान, राहुल, उपेन्द्र, आशुतोष, दीनदयाल, दिग्विजय आदि उपस्थित रहे।

Event Photographs

kashi_katha_1

Photo Exhibition: ‘Ramnagar ki Ramlila

kashi_katha_2

News Coverage

kashi_katha_3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *