गांधी की रचनात्मक दृष्टि और सामाजिक उद्यमिता

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प्रकृति एवं सामाजिक संतुलन से उद्यमिता के सफलता की शत्प्रतिषत गारंटी – प्रो0 पी0के0 मिश्रा

‘‘समाज और व्यापार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। सबसे बड़ा वीटो पावर उपभोक्ता के पास है। उपभोक्तावाद से बड़ा अन्य कोई वाद नहीं है। दीर्घकालिक लाभ कमाने के लिए सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन जरूरी है। सामाजिक उद्यम अपने आप में लाभ और दायित्व निर्वहन की अवधारणा है जिसमें उपभोक्ता और उत्पादक खुद को समाज का महत्वपूर्ण अंग मानते हैं। आज समय आ गया है जब पब्लिक या प्राईवेट सेक्टर की जगह कारपोरेट सेक्टर को युवा समझे और अपनायें। प्।ै परीक्षा की तर्ज पर इण्डिन मैंनेजमेंट सर्विसेज की परीक्षा भी आयोजित की जानी चाहिए जिससे भारतीय दृष्टिकोण में प्रोफेषनलिज्म का अभ्युदय होगा।’’ उक्त बातें बी0एच0यू0 वाणिज्य संकाय के प्रोफेसर एच0के0 सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि कही। वह ‘गांधी की रचनात्मक दृष्टि और सामाजिक उद्यमिता’ विषयक दो दिवसीय कार्यषाला के अन्तिम दिन बोल रहे थे। कार्यषाला का आयोजन आई0आई0टी0 बी0एच0यू0 स्थित मालवीय नवप्रर्वन उद्यमिता संवर्धन केन्द्र में हुआ। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पांच हजार से अधिक तालाबों का निर्माण करवा चुके समाज सेवी धर्मेन्द्र मिश्रा ने आर्थिक मूल्यों पर सामाजिक मूल्यों को तरजीह देते हुए कहा कि सामाजिक मूल्य आत्मनिर्भर बनने के लिए बल प्रदान करते हैं। गांधी जी के बताये रास्ते पर चलकर मानव मूल्य केन्द्रित समाज का निर्माण बनाया जा सकता है। यह उन्हीं विचारों की परिणति है कि आज बुन्देलखण्ड में पांच हजार तालाब बन चुके हैं और पांच हजार तालाब बनने अभी बाकी है।

कार्यषाला के समापन सत्र में मालवीय नवप्रवर्तन उद्यमिता एवं संवर्धन केन्द्र के निदेषक प्रो0 पी0के0 मिश्रा ने प्रकृति और समाज के संतुलन पर जोर देते हुए प्रतिभागियों को 6 पेड़ लगाने की शपथ दिलवाई। प्रो0 मिश्रा ने प्रकृति प्रदत्त सुविधाओं के अति उपभोग पर चिन्ता जताते हुए बताया कि प्रकृति से सिर्फ ले नहीं बल्कि दे भी। ‘वेस्ट मैंनेजमेंट’ की चर्चा करते हुए प्रो0 मिश्रा ने वेस्ट से ऊर्जा उत्पन्न करने को आज की महती जरूरत बताया। सामाजिक कार्यकर्ता और लगभग 15 हजार बच्चों को स्कॉलरषिप कार्यक्रम और इन बच्चों को षिक्षा से जोड़ने का काम कर चुके अंकित पाण्डेय ने सामाजिक उद्यमिता को स्वधर्म बताते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। गांधी विद्या संस्थान की जाग्रति राही ने गरीब महिलाओं और उनके बच्चों की षिक्षा व्यवस्था के लिए प्रषंसनीय काम किया है। उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी के अहसास को आज के युवाओं के लिए सफलता का महामंत्र बताया।

कार्यषाला में प्रो0 एस0एन0 उपाध्याय, प्रो0 नन्दलाल सिंह, डॉ0 विकास सिंह, डॉ0 अनूपपति तिवारी, दिग्विजय त्रिपाठी, अरविन्द मिश्रा, ईषान त्रिपाठी, राहुल पटेल, उपेन्द्र दीक्षित आदि उपस्थित रहे। संचालन संजीव सर्राफ ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ0 अवधेष दीक्षित ने दिया।

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2 thoughts on “गांधी की रचनात्मक दृष्टि और सामाजिक उद्यमिता

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